बुधवार, जून 27, 2012

संत

        संत 
यह  बिलकुल सही है कि
संतो कि वाणी सुनकर 
संतो का जीवन देखकर 
संतो का सुख देखकर 
साधारण आदमी भी 
संत बनना चाहता है ...........
    
सरल है संत बनना 
भगवा वस्त्र पहनना 
चन्दन का टीका लगाना 
शब्द जाल में 
भक्तो को उलझाना 

संत बनने के लिए
बिलकुल जरुरी नहीं है जानना 
हिमालय क्यों पिघल  रहा है 
सूख रही है क्यों नदिया 
युद्ध के क्या होंगे परिणाम 
संत तो बस 
हर तरफ से आंखे मूंदकर
जीवन में भक्ति भाव का 
पाठ पढाता है

संत के लिए 
यह जानना  भी जरुरी नहीं है 
क्या होता है
किराये के मकान का दुख 
पत्नी की प्रसव पीड़ा  
बच्चे का स्कूल मे दाखिला 
प्रतियोगिता के इस दौर में 
खुद से खुद का संघर्ष 

सच तो यह है की 
संत 
गृहस्थी  के लफड़े से भागा हुआ  
गैर  दुनियादार आदमी होता है ............
                                        'ज्योति खरे '

1 टिप्पणी:

रश्मि प्रभा... ने कहा…

भगवा वस्त्र संत की पहचान नहीं
संत होना बिल्कुल आसान नहीं